मानसिक रूप से मजबुत लोग | How To Increase Mental Strength In Hindi

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दोस्तों, आपने  हमेशा ये जानने की कोशिश की हैं की मानसिक रूप से मजबूत कैसे बने / How To Be Mentally Healthy,  या फिर मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए कौनसी कसरत करनी होंगी / How To Increase Mental Strength In Hindi और इसके लिए आपने  कई साइड भी सर्च किये होंगे तो आईये हम जानते हैं की मानसिक रूप से मजबूत होना मतलब क्या ?

मानसिक रूप से मजबुत लोग / How To Increase Mental Strength In Hindi

How To Increase Mental Strength In Hindi
मानसिक रूप से मजबुत होना मतलब आपको क्या चाहिए और कब चाहिए इसे जानना है. इसका मतलब आपके लक्ष्य प्राप्ति के रस्ते में किसी भी बात को पीछे न छोडना है. मानसिक मजबुती मतलब आने वाली परिस्थितियों को पहले से जानकर दुसरे लोगो से आगे बढना है. मानसिक रूप से मजबुत होना आपको उस समय हिम्मत प्रदान करता है जब हर कोई निचे गिरता चला जाता है. मानसिक मजबुती आपको शक्ति प्रदान करती है. मानसिक मजबुती वाले लोग शक्तिशाली होते है. वे इस बात को समझते है की जिंदगी में सब कुछ इच्छानुसार नही होता, लेकीन मानसिक रूप से मजबुत बनकर हम आने वाले मुश्किलो की पहले ही तैयारी कर रख सकते है. कुछ लोगो में मानसिक शक्ति प्राकृतिक देन होती है, उन्हें इसे हासिल करने के दूसरे उपयो के बारे ने नही पता होता है. जबकी दुसरो के लिये ये एक काम है जिसमे अपनी कला को प्रखर बनाने का काम कीया जाता है. निचे ऐसी है 13 बाते दी गयी है जिसमे बताया गया है की मानसिक रूप से मजबुत लोग क्या करते है और क्या नही करते है, और ये सब प्राकृतिक होता है या कोशिशो का परीणाम. इस लेख में यही बताया गया है की वे कैसे जिंदगी के कठीन समय में भी अपनी मानसिकता को बनाये रखते है. और जीवन के उतार चढाव का सामना करते है.

1. मानसिक मजबुती वाले लोग बदलाव को सहज स्वीकार करते है-
बहोत से लोग कहते है की उन्हें बदलाव से नफरत है. लेकिन बहोत से समय में बदलाव कठीन और अनिवार्य होता है, लेकिन वह जो मानसिक रूप से मजबुत है वो इसे स्वीकार करता है और सकारात्मक बदलाव का खुली बाहो से स्वागत करते है. मानसिक मजबुती वाले लोग नरम होते है और उनका जस बात पर पुरा भरोसा होता है की होने वाले बदलाव का सामना करने की उनमे काबिलियत है.

2. मानसिक रूप से मजबुत लोग शक्ति को अपने साथ रखते है-
आपको और आपके जज्बातों को कोई नियंत्रित नही कर सकता और मानसिक रूप से मजबुत लोग इसे जानते है. आप उन्हें इस तरह की बाते करते हुए कभी नही पाएंगे, जैसे, “मेरे दोस्त ने मुझे दुःखी कीया,” क्योकि वे जानते है की उनके जज्बात और उनकी भावना उन्ही के नियंत्रण में है, जब तक वे खुद नही चाहते कोई उन्हें दुःखी नहीं कर सकता. जब कभी भी आप अपने जज्बातों और खुद के नियंत्रण में होते हो, तब आप ये जानते हो की नकारात्मक परिस्थितियों पर कैसी प्रतिक्रिया की जाये.

3.मानसिक रूप से मजबुत लोग कभी खुद के लिये माफी नही चाहते और ना ऐसा कहने लायक महसुस करते है-
मानसिक रूप से मजबुत लोगो के पास किसी जगह पर बैठकर माफी मांगने योग्य महसुस करने का समय नही होता है. वे जानते है की ऐसा करना मतलब समय को व्यर्थ गवाना है, और इसी वजह से सफलता पाने के उद्देश्य से उन्हें अपने द्वारा किये गए कामो की जवाबदारी लेने की जरुरत है. वे इस बात को समझते है की जिंदगी हमेशा सरल और सीधी नही होती, इसीलिए वे हमेशा सतर्क रहते है और आगे बढते चले जाते है.

4. मानसिक रूप से मजबुत लोग ये जानते है की वे सभी को खुश नही कर सकते-
मानसिक रूप से मजबुत रहते हुए हो सकता है की आप कभी-कभी बहोत से लोगो को नाखुश करो. मानसिक रूप से मजबुत लोग ये जान लेते है की वे हर समय सभी को खुश नही कर सकते और कभी भी यदि कही पर ‘नही’ कहने की जरुरत हो तो वे हिचकिचाते भी नही. वे अपने मन की बातो को बाटने में कभी नही शर्माते. बल्कि वे तो सीधे और सरल रहना ही पसन्द करते है. यदि उनसे कोई इंसान नाराज़ हो जाता है तो उस बात को वे नज़रअंदाज़ करते चले जाते है. क्योकि वे जानते है की हर समय वे कभी को खुश नही रख सकते.

5. मानसिक मजबुत लोग उस बात की जरा भी चिंता नही करते जिसे वे बदल नही सकते-
एक प्रसिद्ध सुविचार है, “जिन बातो को मै नही बदल सकता उन्हें स्वीकार करने की ताकत मुझे भगवान ने दी है, साथ ही जिन्हें में बदल सकता हु उन्हें बदलने की हिम्मत दी है और अंतर जानने की आजादी भी दी है.”

6. मानसिक रूप से मजबुत बोल सुनियोजित जोखिम ही लेते है-
सभी जोखिमो को लेना एक जैसा नही है और मानसिक मजबुत लोग बेतुकी जोखिम और सुनियोजित जोखिम के बिच के अंतर को जानते है. वे परिस्थिति को दोनों बाजु से देखते है, उसका निरीक्षण करते और परिस्थिति से सम्बंधित कोई भी बडा निर्णय उसे पुरी तरह जानकार, समझकर लेते है. सुनियोजित जोखिम लेना एक मानसिक रूप से मजबुत इंसान को कभी भी डरा नही सकती.

7. मानसिक रूप से मजबुत लोग अपनी गलतियों से सीखते है-
मानसिक रूप से शक्तिशाली इंसान अपने द्वारा की गयी क्रिया की जवाबदारी भी खुद ही लेता है और भुतकाल में अपने द्वारा की गयी गलतियों से सीखता है. इसी वजह से, एक मानसिक रूप से मजबुत इंसान भुतकाल में की गयी गलतियों को दोबारा नही दोहराता और भविष्य में और ज्यादा अच्छा करने की कोशिश करता है.

8. मानसिक मजबुत लोग कभी भी भुतकाल का विचार नही करते-
अपने भुतकाल के बारे में सोचकर समय व्यर्थ करना और इच्छा जाताना दोनों अलग है, इच्छा जाताना मतलब समय व्यर्थ करना नही होंगा. मानसिक मजबुत लीग कभी भी भुतकाल के बारे में सोचकर समय व्यर्थ नही गवाते. बल्कि वे भुतकाल में अपनी भुमिका का निरीक्षण करते है और उन्होंने उस से क्या सीखा ये बताते है. एक अच्छा मानसिक मजबुत इंसान भुतकाल में घटित अच्छी घटनाओ के बारे में सोचने में भी समय व्यर्थ नही करता. जबकि, वह वर्तमान में जीता है और भविष्य की योजना बनाता है.

9. दुसरो की सफलता को देखते हुए मानसिक रूप से मजबुत इंसान कभी जलनशील नही होता-
मानसिक रूप से मजबुत इंसान को खुद पर पूरा भरोसा होता है, वह खुद सभी पलो का आनंद लेता है और दुसरो की सफलता पर इन्हें शुभकामनाये देता है. जिंदगी में यदि कोई उनसे आगे निकल जाये तो भी उनमे कभी जलन की भावना निर्मित नही होती. ऐसे समय में एक मानसिक बुद्धिमान इंसान बुरा महसुस करने की बजाये सफलता पाने के लिये कठिन परीश्रम के महत्त्व को समझता है. और खुद को कठिन परीश्रम करने के लिये प्रेरीत करता है ताकि वह भी जीवन में सफलता प्राप्त कर सके.

10. मानसिक रूप से मजबुत लोग परीणाम की जल्दबाजी नही करते-
चाहे कोई नया व्यापर करने की बात हो या वजन घटाने की हो, मानसिक रूप से मजबुत लोग ये जानते है की परीणाम आने में समय लगता है. अपनी पुरी लगन और बुद्धिमत्ता से वे काम करते चके जाते है और परीणाम को पुरा समय देते है. क्योकि वे अच्छी तरह जानते है की सब्र का फल मीठा होता है, और अच्छा परीणाम हमेशा समय की मांग करता है.

11. मानसिक रूप से मजबुत लोग अकेले रहने से कभी नही कतराते-
मानसिक रूप से मजबुत लोग खुद ही की कंपनी का मजा लेते है और अकेले रहने के समय को कुछ नया उत्पादित करने का समय समझते है. अकेले रहना कभी भी मानसिक रूप से मजबुत इंसान को डरा नही सकता, क्योकि ऐसे लोग अपने आनंद और खुशी के लीये दुसरो पर निर्भर नही रहते. मानसिक रूप से मजबुत लोग अपने आप में ही आनंदित होते है.

12. मानसिक रूप से मजबुत इंसान कभी हार नही मानते-
मानसिक रूप से मजबुत इंसानो के किये असफल होना मतलब हार मानकर कोशिश करना छोड़ देने का कारण नही है. जबकि वे तो असफलता को आगे बढने के अवसर की तरह देखते है, ताकि वे और अच्छा कर सके, और जब तक वे सफल नही होते तब तक कोशिश करते रहे.

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