गौरी गणपति उत्सव की जानकारी | Gauri Ganpati Information in Hindi

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गणेश चतुर्थी के समय मनाई जाने वाली गौरी गणपति – Gauri Ganpati काफी प्रसिद्ध है। भारत के बहुत से भागो में गणेश चतुर्थी के समय मनाई जाने वाली गौरी पूजा के बहुत से धार्मिक कारण है। भारत के अलग-अलग राज्यों में विविध धर्म के लोग इसे अपने-अपने रीती-रिवाजो के अनुसार मनाते है।

Gauri Ganpati

गौरी गणपति उत्सव की जानकारी – Gauri Ganpati Information in Hindi

ऐसा माना जाता हैं की जैसे एक ब्याही लड़की अपने मायके आती हैं वैसे है गौरी अपने पुत्र गणेश के साथ तीन दिनों के लिए अपने मायके आती हैं। और तीन दिन उनकी बड़ी लाड प्यार से पूजा होती हैं।

कुछ क्षेत्रो में माँ गौरी की प्रतिमा को हल्दी पाउडर से बनाया जाता है और पूजा के दौरान उस प्रतिमा को भगवान गणेश की मूर्ति के साथ रखा जाता है। कुछ भागो में प्रतिमा को विविध सामग्री का उपयोग कर बनाया जाता है और फिर उसे भगवान गणेश की मूर्ति के साथ रखा जाता है। आज हम यहाँ गणेश चतुर्थी के समय मनाई जाने वाली गौरी पूजा के कुछ पारंपरिक रीती-रिवाजो के बारे में जानेंगे।

गणेश चतुर्थी के समय मनाई जाने वाली गौरी पूजा से जुडी पौराणिक कथा:

गौरी, माँ पार्वती का ही एक नाम है, जो भगवान शिव की पत्नी और भगवान गणेश की माँ थी। एक बार माँ गौरी स्नान करने के लिए गयी। प्रथाओ के अनुसार माँ गौरी स्नान करने समय अपने शरीर पर हल्दी लगाती थी। इसके बाद उनके शरीर के मैल से उन्होंने एक छोटे बालक को जन्म दिया। और जब माँ पार्वती स्नान कर रही थी तो उन्होंने उस बालक को द्वार की रखवाली करने को कहा और साथ ही आदेश दिया की वह किसी को भी भीतर न आने दे।

जब भगवान शिव माँ पार्वती से मिलने आए तो उस बालक ने भगवान शिव को भीतर जाने से रोका भी। छोटे बालक को रोता हुआ देख भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया। इसके बाद जब माँ पार्वती ने भगवान शिव को बालक के बारे में विस्तृत बताया तो भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हो चूका था। इसके बाद माँ पार्वती को खुश करने के लिए उन्होंने बालक को नया जीवन देने के लिए उसपर गजमुख लगाया। और इस प्रकार भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई।

नया जीवन देने के साथ-साथ भगवान शिव ने उन्हें अपनी सेना का प्रजापति भी घोषित किया। कहा जाता है की उसी दिन से उस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। चूँकि माँ पार्वती (गौरी) ने ही भगवान गणेश को जन्म दिया है, इसीलिए गणेश चतुर्थी के समय गौरी पूजा का विशेष महत्त्व होता है। साथ ही हल्दी से मा गौरी की प्रतिमा बनाए जाने का भी यही एक कारण है।

गणेश उत्सव एकमात्र ऐसा त्यौहार है जब माँ और पुत्र दोनों को एकसाथ पूजा जाता है।

माँ पार्वती को भारत के कुछ भागो में भगवान गणेश की माँ जबकि पुणे में देवी गौरी को भगवान गणेश की बहन माना जाता है, लेकिन गणेश चतुर्थी के समय लोग श्रद्धा और अपार भक्ति के साथ देवी गौरी की पूजा करते है।

भक्तो का ऐसा मानना है की घर में माँ गौरी के आने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशियाँ बनी रहती है।

देवी गौरी को तीन दिनों तक पूजा जाता है- पहले दिन उनकी स्थापना की जाती है, दुसरे दिन सत्यनारायण पूजा और तीसरे दिन देवी गौरी का विसर्जन किया जाता है।

गौरी पूजा की तैयारियां गणपति उत्सव के साथ ही शुरू हो जाती है, रंगोली की सहायता से महिलाये घर के मुख्य द्वार पर देवी के पदचिन्ह भी बनाती है और फिर देवी गौरी की प्रतिमा (मूर्ति) को भी घर लाती है।

फिर मुहूर्त देखकर देवी को नैवेद्य चढ़ाया जाता है और परंपराओ के अनुसार पर आरती की जाती है और लोग देवी गौरी से प्रार्थना करने लगते है।

गणेश चतुर्थी के समय मनाई जाने वाली गौरी पूजा के बारे में कुछ रोचक बाते:

• गणेश चतुर्थी के समय महाराष्ट्र राज्य के बहुत से घरो में गौरी गणेश की पूजा की जाती है। हर साल गौरी स्थापना अगस्त – सितम्बर के बिच में होती हैं की और स्थापना के पाँच दिन बाद गणपति विसर्जन किया जाता है।
• गौरी को माँ पार्वती का अवतार माना जाता है, जो भगवान गणेश की माँ थी। जबकि महाराष्ट्र में ऐसा माना जाता है की गौरी भगवान गणेश की बहन है जो उनसे मिलने के लिए आती है। घर में माँ गौरी का आना घर की सुख, शांति, स्वास्थ, समृद्धि और खुशियों को दर्शाता है। जबकि गौरी की स्थापना भी माँ गौरी की दो प्रतिमाओ के साथ की जाती है।
• गणेश चतुर्थी के समय माँ गौरी की प्रतिमाओ को गणेश उत्सव के दो दिन बाद घर पर लाया जाता है। वह दिन दिनों तक घर में रहती है। इसके दुसरे दिन सत्यनारायण पूजा का आयोजन किया जाता है और तीसरे दिन उन्हें पानी में बहा दिया जाता है।
• किंवदंतियों के अनुसार दो बहनों के रूप में माँ गौरी हर साल गणेशजी के घर पर आती है। भारत के कुछ राज्यों में माँ गौरी को माँ लक्ष्मी की उपासना भी समझा जाता है।
• कर्नाटक में गौरी को भगवान गणेश की माँ समझा जाता है और गौरी पूजा का आयोजन गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले ही किया जाता है।
• पश्चिम बंगाल में माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी को भगवान गणेश की बहन माना जाता है और इन सभी को माँ दुर्गा की संतान माना जाता है।

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Please Note: गौरी गणपति उत्सव की जानकारी – Gauri Ganpati Information की दी गयी जानकारी को हमने हमारे हिसाब से बताया है।

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2 COMMENTS

  1. बहुत ही उम्दा …. nice article …. ऐसे ही लिखते रहिये और लोगों का मार्गदर्शन करते रहिये। 🙂 🙂

  2. गौरी गणपति का उत्सव शायद हर किसी को पता नहीं आपने इस उत्सव के बारेमें जानकारी बहुत अच्छी से दी हैं. यह उत्सव महाराष्ट्र में बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता हैं. कई जगह इसे महालक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता हैं. गौरी गणपति के समय घर में एक उत्साह का वातावरण रहता हैं. जीवन में एक बार तो गौरी गणपति के दर्शन लेने ही चाहियें.

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