lifestylehindi Best Website For Hindi Article On LifeStyle

डिप्रेशन के लक्षण | Symptoms of Depression

0

कभी न कभी किसी को इस समस्या से गुजरना ही पड़ता है, कोई इस बीमारी से आज या तो कल कभी न कभी गुजरता ही है। ज्यादा समय तक तनाव – Depression रहने से यह आपके लिए एक गंभीर समस्या भी बन सकती है, इसकी वजह से आपको बहुत सी गंभीर बीमारियाँ भी हो सकती है और इस वजह से कई लोग सुसाइड भी करते है।

तनाव के लक्षण कभी भी स्पष्ट नही दिखाई देते, कई बार इसमें या तो इंसान रोता है या तो काफी निराश होता है।

डिप्रेशन के लक्षण – Symptoms of Depression

Depression

तनाव कभी भी एक तरह का नही होता। तनाव के लक्षण आपको धीरे-धीरे दिखाई देते है, इसमें आप दोस्तों के साथ बाहर घुमने की बजाए घर पर अकेले बैठकर टीवी देखने लगते है, ऐसा करते हुए कई बार आपके दिमाग में सुसाइड करने का ख्याल भी आता है। डिप्रेशन में कई लोग खुश रहने की बजाए कई दिनों तक और कभी-कभी कई हफ्तों तक नाराज रहते है। तनाव के लक्षण हर इंसान में अलग-अलग हो सकते है।

चिंता:

चिंता करना कई बार आपके लिए घातक भी साबित हो सकता है, कई बार बिना किसी वजह से आप चिंता करने लगते हो। डिप्रेशन की अवस्था में कोई भी इंसान हमेशा छोटी-छोटी बातो को लेकर चिंता करने लगता है। डिप्रेशन की अवस्था में इंसान हमेशा, लगातार चिंता से ग्रस्त रहता है लेकिन चिंता की अवस्था को पहचानने का कोई स्त्रोत नही है।

चिडचिडापन:

डिप्रेशन की वजह से कई बार लोगो को जल्दी गुस्सा आता है और लोग चिडचिडे होने लगते है, बल्कि छोटी-छोटी बातो से भी आपको गुस्सा आने लगता है। ऐसे समय में इंसान दिनभर चिडचिडा रहता है और इससे आपका पूरा दिन बरबाद हो जाता है।महिलाओ और पुरुषो दोनों में ही डिप्रेशन के लक्षण अलग-अलग होते है। महिलाओ में हो सकता है की वे एक पल के लिए गुस्सा करे और दुसरे ही पल रोने लगे। जबकि पुरुषो में हो सकता है की वे लम्बे समय तक क्रोधित रहे। पारंपरिक रूप से कहा जाता है की इंसान डिप्रेशन की अवस्था में लोगो से मिलना-जुलना छोड़ देता है और अकेला रहने लगता है।

उदासी:

डिप्रेशन (अवसाद) का सबसे सामान्य लक्षण यही है की आप उदास महसूस करने लगते हो और आपको 1 से 2 हफ्तों तक अकेलेपन का अहसास होने लगता है। इस परिस्थिति को कई लोग “निराशा” भी कहते है। ऐसी अवस्था में लोगो को लगने लगता है की उनकी जिंदगी में कुछ भी अच्छा नही होने वाला है और इसी वजह से उनकी उदासी दिन प्रति दिन बढती चली जाती है। यदि इंसान दो या उससे ज्यादा सालो तक लगातार निराश रहे तो इसे Dysthymia भी कहते है। यह एक तरह का जीर्ण अवसाद (डिप्रेशन) है, जिसमे इंसान का मूड हमेशा निराशा से भरा होता है।

नींद की समस्या:

लोगो के सोने की आदत भी डिप्रेशन की समस्या के वजह से बदल जाती है। डिप्रेशन से पीड़ित लोग ना ही सो पाते है और ना ही उन्हें गहरी नींद लगती है। ऐसे लोगो की नींद आधी रात में ही खुल जाती है और फिर बाद में दोबारा वे लोग नही सो पाते। कयी बार डिप्रेशन की अवस्था में आप लम्बे समय तक सो जाते है लेकिन वे जल्दी उठ नही पाते। इस वजह से आपको थकान भी महसूस हो सकती है और आपका किसी भी काम में ध्यान नही लगता।

नाकाबिल:

इस अवस्था में इंसान को लगातार नाकाबिल, अपराधी और निराशा वाली अनुभूति होती है। इस अवस्था में लोग अपनी भूतपूर्व असफलताओ पर ध्यान केन्द्रित करने लगते है। और जब उनके जीवन में कुछ भी सही नही चल रहा होता है तो वे खुद को ही उसका दोष देने लगते है। जिन युवाओ को डिप्रेशन की समस्या होती है वे साधारणतः हमेशा ही खुद को नाकाबिल समझने लगते है। इससे कई बार दूसरो के साथ आपकी ग़लतफ़हमी भी हो सकती है और आप लोगो से बात करना भी बंद कर देते हो।

थकान:

डिप्रेशन वाले लोगो में अक्सर उर्जा की कमी होती है और ऐसे लोग हमेशा खुद को थका हुआ महसूस करते है। ऐसे समय में डिप्रेशन से पीड़ित इंसान को छोटे से छोटा काम करने में भी काफी महेनत करनी पड़ती है। डिप्रेशन से पीड़ित इंसान हमेशा थका हुआ रहता है। डिप्रेशन में आपके दिमाग में हमेशा नकारात्मक विचार ही आने लगते है और इसकी वजह से आप दिन-रात निराश रहने लगते हो।

अपराध:

डिप्रेशन की वजह से आपकी दिमागी स्थिति भी ख़राब हो सकती है, इससे आपके दिमाग की रासायनिक क्रिया में असंतुलन बना रहता है। जबकि डिप्रेशन से पीड़ित लोग, इसके लक्षणों की बजाए खुद को ही इसका दोषी मानने लगते है। ऐसे लोगो के लिए “मै कुछ भी सही नही कर सकता” और “सबकुछ मेरी ही गलती है” जैसे वाक्य सामान्य हो जाते है।

दुःख की घड़ियाँ:

डिप्रेशन से पीड़ित लोग कई बार बिना किसी वजह से रोने लगते है। दुःख की घडियां भी डिप्रेशन की समस्या का ही एक लक्षण है। कई बार यह अवस्था महिलाओ में जन्म देने के बाद आती है।

ज्यादा खाना या भूख न लगना:

डिप्रेशन की वजह से आपका वजन भी कम हो सकता है। जबकि दुसरे लोगो में डिप्रेशन की समस्या में उनका वजन बढ़ने भी लगता है। इसी वजह से कई लोग चिडचिडा भी महसूस करने लगते है और वे लोग केवल खाने को ही अपनी समस्या का हल समझने लगते है। इसी वजह से आपका वजन बढ़ने लगता है और आपकी उर्जा हद से ज्यादा बढ़ने लगती है। जबकि जो लोग डिप्रेशन की अवस्था में पर्याप्त खाना नही खाते उन लोगो में अक्सर उर्जा की कमी होने लगती है।

उदासीनता:

डिप्रेशन से पीड़ित लोग किसी भी काम में अपनी रूचि खोने लगते है और किसी भी काम में वे ख़ुशी नही ढूंढ पाते। फिर चाहे वे अपने प्रिय के पास हो या सेक्स कर रहे हो, वे हमेशा उदास रहते है।

बेचैनी:

डिप्रेशन के साथ आपको बेचैनी, उदासी, निराशा और हातो के थपथपाने जैसी समस्या हो सकती है। बेचैनी, डिप्रेशन के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है।

एकग्रता की कमी:

डिप्रेशन से पीड़ित लोगो को अक्सर समय याद नही रहता, वे ध्यान नही लगा पाते और ना ही निर्णय ले पाते है। डिप्रेशन की स्थिति में आपको थकान, चिंता और उदासी तो होती ही है लेकिन साथ ही वे किसी भी काम में अपना ध्यान नही लगा पाते। ऐसे लोगो के लिए कोई भी काम करना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसी अवस्था में आपके परिवार और दोस्त लोग आपस में बातचीत करने लगते है और मजे करते है लेकिन आप एकाग्रता की कमी से इन बातो पर ध्यान नही दे पाते। ध्यान में एकग्रता की कमी से ही आपको डिप्रेशन की बीमारी हो सकती है।

आत्महत्या के विचार:

डिप्रेशन से पीड़ित लोग अक्सर अपनी मृत्यु के बारे में सोचते रहते है और सुसाइड करने की कोशिश करते रहते है। मेयो क्लिनिक के अनुसार वृद्ध इंसानों में सुसाइड के विचार आना ही डिप्रेशन के शुरुवाती लक्षण है। भले ही शुरू में आपको इसे पहचानने में देरी हो लेकिन धीरे-धीरे आप जैसे-जैसे डिप्रेशन की बीमारी से जूझते हो वैसे-वैसे आपको इसे पहचानने में आसानी हो जाती है।

यदि आपके परिवार का कोई सदस्य या आपका कोई दोस्त ज्यादा सोचते रहता है और अकेला ही कुछ बडबड करने लगता है और समझ जाइये की उसे तुरंत किसी औषधीय इलाज की जरुरत है। क्योकि कई बार डिप्रेशन की हालत में इंसान का मानसिक स्वास्थ भी ख़राब हो सकता है।

शारीरिक दर्द:

पेट का दर्द, शरीर का दर्द, सिर दर्द, ऐठन और पाचन संबंधी बीमारियाँ भी आपको डिप्रेशन की अवस्था में होने लगती है। युवा एवं किशोर बच्चो में डिप्रेशन के समय अक्सर शारीरिक दर्द होने लगता है। ऐसी परिस्थिति में वे अक्सर स्कूल जाने से मना करते है और वे होने वाले दर्द की वजह से चिपचिपा महसूस करने लगते है।

निष्कर्ष:

जब आप डिप्रेशन से जूझ रहे होते हो, तो केवल होने वाले लक्षणों का इलाज करना ही सबकुछ नही होता। इसके लिए आपको रोज खुश रहने की कोशिश करनी पड़ेगी। डिप्रेशन का इलाज करने की बजाए आप शुरू से ही खुश रहना सीखो। क्योकि यदि आप हमेशा खुश रहोंगे तो आप हमेशा डिप्रेशन की समस्या से दूर रहोंगे। लेकिन यदि आप बार-बार यदि डिप्रेशन के लक्षणों को खुद में पाते हो तो सबसे पहले तुरंत अपने निजी डॉक्टर से मानसिक जाँच करवा ले।

Read More: Health Tips

अगर आपको हमारा डिप्रेशन के लक्षण / Symptoms of Depression लेख अच्छा लगा तो जरुर हमें कमेन्ट के माध्यम से बताएं. और Facebook पर लाइक करके हमसे जुड़ें. धन्यवाद

Leave A Reply

Your email address will not be published.