अश्वगंधा से होने वाले स्वास्थकारी फायदे | Benefits of Ashwagandha

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Ashwagandha – अश्वगंधा को भारत में औषधीय पौधे, विष करौदा और जाड़े के मौसम की चेरी के नाम से जाना जाता है। इसकी बहुत सी प्रजातियाँ दिखने में लगभग एक जैसी ही है। आयुर्वेदिक औषधियों में इसका उपयोग जडीबुटी के रूप में किया जाता है।

अश्वगंधा एक स्वास्थकारी औषधीय जडीबुटी है। अश्वगंधा से होने वाले बहुत से स्वास्थकारी फायदे हैं उनमेंसे कुछ फ़ायदो के बारेमें जानेंगे –

अश्वगंधा से होने वाले स्वास्थकारी फायदे – Benefits of Ashwagandha

Ashwagandha

1. ह्रदय का स्वास्थ:
अश्वगंधा शरीर के ह्रदय के स्वास्थ को विकसित करने और बहुत से कारणों की वजह से होने वाले ह्रदय विकारो के खतरे को कम करने में भी सहायक है। अश्वगंधा ह्रदय में रक्त प्रवाह के संचार के बढाता है, जिससे रक्त थक्का की समस्या से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही यह ब्लड शुगर की मात्रा को भी स्थायी रखता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करता है। साथ ही अश्वगंधा शरीर में ब्लड प्रेशर की लेवल को भी नियंत्रित रखने में सहायक है।

2. कामोत्तेजक की तरह:
आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर कामुकता और जनन अक्षमता संबंधी समस्याओ से छुटकारा पाने के लिए अश्वगंधा खाने का सुझाव देते है। यह मानवीय कामेच्छा की मरम्मत करता है, नपुंसकता को निरोगी बनाता है और पुरुषो में वीर्य के उत्पादन को बढाता है। दक्षिण एशिया में इसका ज्यादातर उपयोग यौन शक्ति बढ़ाने वाली औषधि के रूप में किया जाता है। साथ ही यह मानवी शरीर में यौन स्वास्थ और शक्ति बढ़ाने का भी काम करता है। इसके साथ-साथ यह जडीबुटी हमारे दिमाग को शांत रखने और कामुकता की इच्छाशक्ति और प्रदर्शन क्षमता विकसित करने में सहायक है।

3. अनिद्रा की बीमारी को दूर करता है:
अनिद्रा की बीमारी को ठीक करने में अश्वगंधा काफी प्रभावशाली साबित हुआ है। इसमें पाए जाने वाले शांतिदायक और कायाकल्प तत्व हमारे शरीर में उर्जा का निर्माण करते है, जिससे हमें अच्छी और गहरी नींद लगती है। साथ ही यह तंत्रिका तंत्र को भी स्वस्थ रखने में सहायक है और कायाकल्प हमारी अनिद्रा की समस्या को हमेशा दूर करता है।

4. कैंसर:
हाल ही में हुए सर्वे से यह पता चला है की अश्वगंधा में कैंसर की कोशिकाओ को रोकने की क्षमता पायी जाती है। अश्वगंधा कैंसर की कोशिकाओ को समाप्त कर कैंसर से लढने वाली कोशिकाओ का निर्माण करने में सहायक है। साथ ही इसमें एंटीजिनिक तत्व भी पाए जाते है जो कैंसर के समय नयी रक्त कोशिकाओ के निर्माण को रोकते है और स्वस्थ कोशिकाओ के निर्माण को बढावा देते है।

5. प्रतिरक्षा तंत्र:
इस छोटे और मोटे पौधे में बहुत से फायदे छुपे हुए है, अश्वगंधा से होने वाले सबसे प्रचलित फायदों में से यह एक है। अश्वगंधा हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र की क्षमता को विकसित करने में सहायक है। बहुत से अभ्यासों से यह पता चला है की अश्वगंधा हमारे शरीर में सफ़ेद रक्त कोशिकाओ के निर्माण को बढाता है। जिससे हमें बहुत सी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। कहा जाता है की बीमारी के बाद प्रतिरक्षा तंत्र पुर्नविकसित करने के लिए अश्वगंधा ही सबसे अच्छी जडीबुटी है।

6. तनाव दुर करने में सहायक:
अश्वगंधा में प्रभावशाली तनाव कम करने वाले तत्व पाए जाते है। अकाल उम्र का बढ़ना साधारणतः दीर्घकालीन मानसिक अशांति से जुड़ा हुआ होता है जिससे हमारे शरीर में अतिरिक्त तनाव की उत्पत्ति होती है। यह अतिरिक्त तनाव हम आसानी से अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटीओक्सिडेंट की सहायता से दूर कर सकते है। अश्वगंधा में पाए जाने वाले तनाव निरोगी तत्वों का उपयोग अक्सर डिप्रेशन की औषधियों में भी किया जाता है। साथ ही अश्वगंधा का उपयोग एंटी-डिप्रेशन ड्रग्स के रूप में भी किया जाता है।

7. व्याकुलता / चिंता:
अभ्यास से यह पता चला है की अश्वगंधा सफलतापूर्वक मरीज में चिंता और व्याकुलता के लक्षणों को पूरी तरह से दूर करता है। यह चिंता और दर्दभरे अटैक के समय गाबा (गामा एमिनो ब्यूटायरिक एसिड) की तरह काम करता है।

8. एंटीओक्सिडेंट:
अश्वगंधा पूरी तरह से जुड़ा हुआ होता है जिसमे शक्तिशाली एंटीओक्सिडेंट तत्वों का समावेश होता है। यह शरीर में पाए जाने वाले मुक्त रेडिकल्स का विनाश करता है जो बहुत सी बीमारियों का कारण बनते है। इससे ट्यूमर और दूसरी हानिकारक बीमारियों का विकास नही हो जाता।

9. शक्ति और प्रबलता:
उर्जा और जोश की कमी होने के बाद अश्वगंधा शरीर में शक्ति और प्रबलता की पुनर्निर्मिति करता है। यह यह रोगक्षम तंत्र को प्रोत्साहित कर शरीर की गतिविधियों को बढाता है। यह वातज्वर और ट्यूबरक्लोसिस की समस्या से जूझ रहे मरीजो के लिये काफी लाभदायक है।

10. ब्लड शुगर प्रमाण:
अश्वगंधा ब्लड शुगर के प्रमाण को नियंत्रित करता है, जिससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है। इसी वजह से अश्वगंधा को दुसरे तरह के डायबिटीज को ठीक करने में सबसे प्रभावशाली जडीबुटी माना गया है।

11. इन्फेक्शन:
अश्वगंधा की जड़ो में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल तत्व पाए जाते है जो बहुत से इन्फेक्शन को दूर करने में कारगर साबित हुए है। अश्वगंधा में पाए जाने वाले गुण हमें दर्द और महिलाओ को स्त्रवन की समस्या से छुटकारा दिलाते है। साथ ही यह गर्भाशय और प्रज्वलन की समस्या को दूर करने में भी सहायक है।

12. पेट दर्द:
अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटीमाइक्रोबियल और एंटीबैक्टीरियल तत्व हमें हानिकारक बैक्टीरिया साल्मोनेला से बचाते है, जो पेट दर्द का मुख्य कारण है।

अश्वगंधा से होने वाले त्वचा संबंधी लाभ:

13. उपचारात्मक घाव:
यह उपचारात्मक घावो को ठीक करने में सहायक है। इस पौधे की पत्तियाँ उपचारात्मक पुलटिस प्रदान करती है, जो घावो की तुरंत भरने में सहायक है। इसके लिए अश्वगंधा की जड़ो को पीसकर उसमे थोडा पानी मिलाकर, मुलायम पेस्ट तैयार करे। अब इस पेस्ट को घाव वाली जगह पर लगाए। कुछ ही देर में आपको आराम मिलेगा।

14. रुखी और सुखी त्वचा से छुटकारा:
अश्वगंधा केराटोसिस को ठीक करने में भी सहायक है, यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमे आपकी त्वचा रुखी और सुखी दिखने लगती है। रोजाना दिन में दो बार 3 ग्राम अश्वगंधा का सेवन करने से हम इस समस्या से छुटकारा पा सकते है।

15. आयुवृद्धि के लक्षणों से लढता है:
अश्वगंधा में अत्यधिक मात्रा में एंटीओक्सिडेंट पाए जाते है जो मुक्त रेडिकल्स को काटकर चेहरे की झुर्रियो, डार्क स्पॉट, फाइन लाइन्स और खुरदुरी त्वचा की समस्या से छुटकारा दिलाते है। साथ ही अश्वगंधा त्वचा के कैंसर से भी बचाता है।

16. त्वचा की सुजन से लढता है:
आयुर्वेदिक चिकित्सको ने अश्वगंधा का त्वचा संबंधो रोग जैसे मुहाँसो को दुरने के लिए उपयोग करने की सलाह दी है। इसमें अनोलिड़ेस नाम का तत्व पाया जाता है जो औरयूस बैक्टीरिया का विनाश करने में सहायक है। यही बैक्टीरिया त्वचा के सुजन का मुख्य कारण होता है।

अश्वगंधा से बालो को होने वाले फायदे:

1. समय से पहले बालो के पकने की समस्या से बचाता है:
अश्वगंधा में बालो में होने वाले मेलेनिन के नुकसान को रोकता है और बालो को समय से पहले पकने की समस्या से बचाता है। इसमें टायरोसिन और एमिनो एसिड पाया जाता है जो शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है। अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटीओक्सिडेंट प्रभावशाली रूप से ऊतको के क्षरण और समय से पहले बालो के पकने की समस्या से बचाते है।

2. बालो के झड़ने की समस्या को नियंत्रित करता है:
महिला और पुरुष दोनों में चिंता ही बालो के झड़ने का मुख्य कारण है। अश्वगंधा शरीर में कॉर्टिसोल के प्रमाण को कम करके बालो के झड़ने की समस्या को दूर करता है।

3. बालो के स्वास्थ को विकसित करता है:
अश्वगंधा पाचन तंत्र को स्वस्थ करके शरीर से हानिकारक टोक्सिन को बाहर निकाल फेकता है और बालो को स्वस्थ रखता है।

4. बालो के गिरने की समस्या से लढता है:
अश्वगंधा गंजेपन की समस्या के लिए लाभदायक है। यह समय से पहले ही गंजेपन की समस्या से निजात दिलाता है।

5. इन्फेक्शन से बचाता है:
रोजाना अश्वगंधा का सेवन करने से यह प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को इन्फेक्शन और विविध बीमारियों से दूर रखता है। इससे हमारे शरीर का स्वास्थ अच्छा रहता है और बाल भी घने और मुलायम रहते है।

6. बालो को टूटने से रोकता है:
अश्वगंधा में ज्यादा मात्रा में एंटीओक्सिडेंट पाए जाते है जो हमारे शरीर को मुक्त रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते है। इसीलिये, अश्वगंधा के रोजाना सेवन करने से हमारे बाल मजबूत होते है और हमें बालो के टूटने की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।

7. रुसी और दूसरी त्वचा संबंधी समस्याओ से निजात दिलाता है:
अश्वगंधा में पाए जाने वाले अ-उत्तेजित तत्व हमारी खोपड़ी में हुए रूसियो की समस्या से छुटकारा दिलाते है।

अश्वगंधा से होने वाले दुष्प्रभाव –

अश्वगंधा से होने वाला ऐसा कोई हानिकारक दुष्प्रभाव तो नही है लेकिन ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने से आपको कुछ स्वास्थ संबंधी समस्याये जरुर हो सकती है।

हो सकता है की इसका सेवन करने के एक हफ्ते बाद आपको लगे की अचानक ही आपके शरीर का टेम्परेचर बढ़ गया हो। हो सकता है की टेम्परेचर अचमक कम हो गया हो, आपको ठंड लगने लगे या छाती में दर्द होने लगे। हद से ज्यादा मात्रा में अश्वगंधा का सेवन करने से होने वाले दुष्परिणाम निचे दिए गये है –

1. गर्भवती महिला ने कभी भी अश्वगंधा का सेवन नही करना चाहिए, क्योकि इसका प्रभाव उनके पेट में पलने वाले नवजात शिशु पर भी पड़ सकता है। साथ ही इससे गर्भवती महिलाओ में गर्भाशय संबंधी समस्या भी हो सकती है।

2. अश्वगंधा में मूत्रवर्धक तत्व पाए जाते है जो कभी-कभी किडनी में होने वाली क्षति का कारण भी बन सकते है। यदि बहुत ज्यादा मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो इससे डायरिया भी हो सकता है।स ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर में दर्द की अनुभूति भो होने लगती है।

3. जिसने अंग प्रत्यारोपण (बॉडी ट्रांसप्लांट) किया हो उन लोगो को अश्वगंधा का सेवन नही करना चाहिए, इससे उन्हें जल्दी राहत नही मिलेगी।

4. अश्वगंधा का सेवन यदि दूसरी शामक और शांत औषधियों के साथ किया जाए तो यह शरीर के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। गंभीर मामलो में अश्वगंधा से किसी को हानिकारक बीमारी भी हो सकती है।

5. इससे आपके पाचन तंत्र में भी कभी-कभी समस्या आ सकती है और ज्यादा मात्रा में इसका लगातार सेवन करते रहने से ब्लड प्रेशर कम होना और अनियमित ह्रदय गति लय जैसी समस्या हो सकती है।

6. काठिन्य की समस्या से जूझ रहे मरीज ने मश्वगंधा का सेवन भूल कर भी नही करना चाहिए, इससे गंभीर स्वास्थ संबंधी बीमारी हो सकती है।

7. अश्वगंधा में प्रतिरक्षा तंत्र को प्रोत्साहित करने के तत्व पाए जाते है, जो की HIV और AIDS जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजो के लिए लाभदायक नही होते, उनपर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।

8. अश्वगंधा से होने वाले दुष्परिणामो में अचानक आपका वजन भी बढ़ सकता है।

9. अश्वगंधा का उपयोग हमेशा दूसरी लाभदायक एवं उपर्युक्त जडीबुटीयो के साथ ही करना चाहिए। ताकि इससे होने वाले दुश्परिनामो से भी बचा जा सके।

इसीलिये, हमेशा कभी भी रोजाना अश्वगंधा का सेवन करने से पहले एकबार अपने निजी डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लीजिए।

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