सूर्य नमस्कार के फ़ायदे | Surya Namaskar Benefits And steps In Hindi

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सूर्य नमस्कार / Surya Namaskar एक योगा है, जो दुसरे आसनों से भी जुड़ा हुआ है। सूर्य नमस्कार को अलग-अलग नामो से भी जाना जाता है। कोई भी योगी अपने आसानो को शुरू करने से पहले सूर्य नमस्कार करता है, ताकि वह सफलता से अपने आसन की शुरुवात कर सके।

सूर्य नमस्कार के फ़ायदे – Surya Namaskar Benefits And steps In Hindi
surya namaskar

हम सभी जानते है की सूरज के बिना धरती पर जीवन ही नही है। सूर्य नमस्कार / Sun Salutation एक प्राचीन तकनीक है, जिसका सम्मान आज भी लोग करते है। प्रतीकवाद के अनुसार, सूरज को उर्जा का स्त्रोत माना गया है। इसके इतिहास को देखा जाए तो, भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों ने यह बताया था की शरीर के विविध भागो पर अलग-अलग देव शासन करते है।

सूर्य नमस्कार के फायदे  – Surya Nmaskar Benefits 

1. चिंता दूर करता है –

दिमाग की स्मरण शक्ति और तंत्रिका तंत्र को विकसित करने में भी सूर्य नमस्कार सहायक है और रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आपकी चिंता भी आसानी से दूर हो जाती है।

2. वजन कम करने में सहायक –

सूर्य नमस्कार जब तेजी से किया जाए, तब आपको बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट देता है जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है। यह आसन पेट की माँसपेशियो के खिचाव को कम करने में भी सहायक है। इस आसन से आपकी चयापचन की क्षमता भी विकसित होती है।

3. माँसपेशियो और जोड़ो को मजबूत बनाने में सहायक –

सूर्य नमस्कार आपकी माँसपेशियो, जोड़ो, बंधन और साथ ही कंकाल तंत्र के खिचाव और उन्हें मजबूत बनाने में सहायक है। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी भी लचीली होती है। जब आप यह आसन करते हो, तब आपके अवयव मजबूत होकर इंटरनल ऑर्गन के कार्य करने की क्षमता को बढाते है।

4. दमकती त्वचा देता है –

सूर्य नमस्कार आपके शरीर में रक्त प्रवाह को विकसित करता है जिसका निखार आपको अपने चेहरे पर दिखाई देता है, इससे आपके चेहरे से झुर्रियो की समस्या दूर होती है और आपका चेहरा जवां और दमकता हुआ दिखाई देता है।

5. पाचन तंत्र के कार्य को सुचारू रूप से चलाने में सहायक –

सूर्य नमस्कार हमारे पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहायक है। यह योग आसन आपके शरीर में खून के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है, जिससे आपका पाचन तंत्र अच्छी तरह से कार्य करता है। साथ ही सूर्य नमस्कार के दौरान किये जाने वाले आसनों से आपके पेट का आकर भी आंतरिक रूप से बढ़ता है, जिससे आपके पेट में पायी जाने वाली साड़ी हानिकारक गैस बाहर निकल जाती है।

6. अनिद्रा के साथ सामना करने में सहायक –

सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से आप अपने सोने के तरीको को भी बदल सकते हो। इस आसन को करने से आपका दिमाग शांत रहता है, और इससे रात में आपको अच्छी नींद आती है। इससे यह तो निश्चित हो ही जाएंगा की अबसे आपको सोने के लिए किसी दवा का सहारा नही लेना पड़ेंगा।, और सूर्य नमस्कार करने से आपको बिना किसी बाधा के गहरी नींद आएँगी।

7. नियमित रूप से चले आ रहे मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है –

सूर्य नमस्कार महिलाओ के लिए भी लाभदायक ही है, जो महिलाये अनियमित मासीक धर्म की समस्या से पीड़ित है, उनके लिए सूर्य नमस्कार सबसे अच्छा उपाय है। रोजाना सूर्य नमस्कार करने से महिलाओ में नियमित रूप से मासिक धर्म आते है। और सूर्य नमस्कार करने के महिलाओ के नवजात शिशु के जन्म के समय में भी सहायता मिलती है।

8. खून में शुगर की कमी को कम करता है –

हमारे विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य नमस्कार के आसनों को करने से आपके खून में पाए जाने वाली शुगर का प्रमाण कम हो जाता है और सूर्य नमस्कार आपको ह्रदय संबंधी बीमारियों से भी बचाता है।

सूर्यनमस्कार  मंत्र – Surya Namaskar Mantra

॥ ॐ ध्येयः सदा सवित्र मण्डल मध्यवर्ती नारायण सरसिजा सनसन्नि विष्टः
केयूरवान मकरकुण्डलवान किरीटी हारी हिरण्मय वपुर धृतशंख चक्रः ॥

ॐ मित्राय नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ भानवे नमः।
ॐ खगाय नमः।
ॐ पुषणे नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
ॐ मरीचये नमः।
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ सवित्रे नमः।
ॐ अर्काय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ श्रीसवित्रसूर्यनारायणाय नमः।

॥ आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने
आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते ॥

सूर्यनमस्कार करने की स्टेप – Surya Namaskar Steps

स्टेप 1 :

अपने आसन (मैट) के किनारे पर खड़े हो जाएँ, अपने दोनों पंजे एक साथ जोड़ कर रखें और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। अपनी छाती फुलाएँ और कंधे ढीले रखें।
साँस लेते समय दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और साँस छोड़ते समय हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएँ।

स्टेप 2 :

साँस छोड़ते हुए रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए कमर से आगे की तरफ झुके। फिर पूरी तरफ से साँस को छोड़ते हुए दोनों हाँथो को पंजो के पास जमीन पर रखे।

स्टेप 3 :

साँस लेते हुए जितना संभव हो अपने दाहिने पैर को पीछे की तरफ ले जाए, आप दाहिने घुटने को जमीन पर भी रख सकते है, लेकिन सामने अपनी नजर उपर ही रखे। ध्यान रहे की बाया पैर दोनों हथेलियों के बीच में रहना चाहिए।

स्टेप 4 :

अब बाए पैर को पीछे की तरफ कर उसे दाहिने पैर से मिला ले। अपने नितंब (Hips) को उपर की तरफ उठा ले। सिर को भी सामने की तरफ झुकाकर दोनों हाँथो के बीच में रखे। सीधा एक पर्वत के समान आकर बनाये।

स्टेप 5 :

अब आराम से अपने दोनों घुटने जमीन पर लाये और साँस छोड़े। अब अपने कुल्हो को पीछे की तरह ओर उठाये। और अपने पुरे शरीर को आगे की तरफ झुकाए। ध्यान रहे की आपकी छाती सामने से जमीन को छूनी चाहिये।
अपने बीच के भाग को थोडा उठाकर ही रखे।

स्टेप 6 :

अब अपने कुल्हो को धीरे से निचे की तरफ ले आए। हाँथो की कुहनियो से सीधा करे तथा सिर और पीठ को पीछे की तरफ तानकर कमान जैसा करे। अपनी नजर को आकाश की तरफ ही रखे। इस आसन में शरीर का आकार सर्प के समान होता है।

स्टेप 7 :

अब साँस को छोड़ते हुए कुल्हो और रीढ़ की हड्डी के निचले भाग को उपर उठाये और छाती को भी निचे झुकाकर उलटे V के आकार में आ जाए।

स्टेप 8 :

साँस लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाँथो के बीच में ले जाए, बाए घुटने को जमीन पर ही रहने दीजिए। और अपनी नजर को हमेशा उपर की तरफ रखे। दाहिने पंजे को दोनों हाँथो के बीच में रखे।

स्टेप 9 :

साँस छोड़ते हुए बाए पैर को आगे लाये, हथेलियों को जमीन पर ही रहने दीजिए। अगर जरुरत पड़े तो घुटनों को मोड़ सकते है।

स्टेप 10 :

साँस लेते हुए रीढ़ की हड्डी को धीरे-धीरे उपर लाये, हाँथो को उपर और पीछे की तरफ ले जाए और अपने कुल्हो को आगे की तरफ सरकाए।

स्टेप 11 :

साँस छोड़ते हुए पहले शरीर सीधा करे और फिर हाँथो की निचे लाये। इसी अवस्था में विश्राम करे और शरीर में हो रही संवेदनाओ का पालन पोषण करे।

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