उज्जायी प्राणायाम | Ujjayi Pranayama

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बाबा रामदेव योगा / Baba Ramdev Yoga में अलग-अलग योग अवस्थाएं और विधि होती है जो अच्छी सेहत और शरीर को तंदरुस्त करने के लिए सहायक होती है। उज्जयी प्राणायाम / Ujjayi Pranayama से हम अपनी साँसों पर विजय पा सकते हैं और इसलिए इस प्राणायाम को अंग्रेजी में विक्टोरियस ब्रेथ (Victorious Breath) कहा जाता हैं. उज्जयी प्राणायाम करते समय समंदर की आवाज के समान ध्वनि आती हैं इसलिए इसे ओशियन ब्रेथ (Ocean Breath) भी कहा जाता है. इस प्राणायाम को करने से गर्म हवा शरीर में जाती हैं जो शरीर में बसे दूषित और जहरीले पदार्थ बहार निकालने में मदद करती है. इस प्राणायाम में दोनों, सांस लेना और सांस छोड़ना नाक के जरिये किया जाता है. साँस गले से अंदर जाती है और इससे मासपेशियां भी सिकुड़ जाती है, जिससे समंदर की आवाज के समान ध्वनि आती हैं. गले की नली छोटी होने की वजह उस से हवा तेज गति से जाती है.

उज्जायी प्राणायाम / Ujjayi Pranayama
Ujjayi Pranayama

उज्जायी प्राणायाम करने की विधी / How To Do ujjayi Pranayama –

इस प्राणायाम / Pranayam को करते समय सबसे पहले आप आराम से बैठ जाइये. इस बात का ध्यान रखे की आप साँस अंदर और बाहर नाक से ही ले और अपना मुह बंद रखे. आप लंबी-लंबी साँसे ले और धीरे-धीरे छोड़े.

आप अपने गले की मासपेशियों को सिकुड़ने दे इससे आपके गले की नलि छोटी और पतली होंगी जिससे आप को लंबी साँसे लेने में आसानी होगी. आप उज्जयी प्राणायाम को शुरुआत में 3 मिनट तक ही करे फिर धीरे-धीरे 10 मिनट तक लेकर जाये. आपका साँस लेने और छोड़ने का समय एक ही (बराबर) होना चाहिये.

इस प्राणायाम को करते समय अगर आपका दिमाग भटके तो आप सामान्य रूप से लगातार साँस लेते रहे.

उज्जयी प्राणायाम / Ujjayi Pranayama को करते समय साँसों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये इससे आप में एकाग्रता बढेंगी.

उज्जयी प्राणायाम करने से आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) बढ़ता है. इस प्राणायाम को करने से फेफड़े की ऑक्सीजन (Oxygen) ग्रहण करने की क्षमता भी बढती है.

भस्त्रिका प्राणायाम में साँसों को बाहर छोड़ने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये. इस प्राणायाम को करते समय एक बार में 5 बार साँस छोड़े. इस बात को ध्यान रखे की इसमें साँस को जोर-जोर से ना छोड़े, इससे आप के फेफड़े ख़राब हो सकते है. भस्त्रिका प्राणायाम करने से त्रि दोष संतुलित रहते है और मन शांत रहता है.

नाड़ी शुधि प्राणायाम को अंग्रेजी में अल्टरनेट नोस्ट्रिल (Alternate Nostril) कहते है, इसमें दोनों नासिकाओ से एक के बाद एक साँस लेते है. अगर आप एक ही नासिका से ज्यादा साँस लेने लगोगे तो आपकी सेहत ख़राब हो सकती है. अगर दाँई नासिका से ज्यादा साँस लेते है तो आपको मानसिक परेशानियाँ हो सकती है, और अगर आप बाँई नासिका से ज्यादा साँस लेने लगोगे तो आप थकान महसूस करेंगे और दिमाग की कार्य क्षमता भी कम हो सकती है. इस प्राणायाम को करने से दिमाग शांत और संतुलित रहता है. अगर आप को बहुत से प्राणायामो के लाभ लेने हो तो आप योगिक डाइट (Diet) ले, जिससे आपको श्वसन प्रक्रिया में लाभ होंगा और आपका शरीर स्वस्थ रहेगा.

उज्जयी प्राणायाम / Ujjayi Pranayama को विक्टोरियस ब्रेथ (Breath)और ओशियन ब्रेथ (Breath) भी कहा जाता है. बच्चो के योग शिबीर में इसे डार्थ वडेर (Darth Vader) कहा जाता है. इस प्राणायाम को करने से फूं-फूं की आवाज निकलती है. जो की एक महत्वपूर्ण श्वसन प्रक्रिया मानी जाती है. इस प्राणायाम में हवा गले की घर्षण के कारण आवाज निकलती है. यह आवाज लरैंक्स (Larynx) के कारण निकलती है. इसी वजह से इसे उज्जयी प्राणायाम कहते है.

उज्जयी प्राणायाम के लाभ / Benefits Of ujjayi Pranayam –

उज्जयी प्राणायाम / Ujjayi Pranayama से शरीर में गर्मी बढती है, और इस प्राणायाम से निकलने वाली आवाज से दिमाग शांत और एकाग्रचित रहता है. यह प्राणायाम हाई बी.पी. और दिल से संबंधित बीमारियो के लिये भी लाभदायक है. उज्जयी प्राणायाम से शरीर का दर्द, इन्सोमिया (Insomia) और माइग्रेन (Migraine) जैसी बिमारियाँ ठीक होती है.

उज्जयी प्राणायाम से शरीर साफ रहता और उर्जा बनी रहती है. इस प्राणायाम से दिमाग की गर्मी कम होती है और फेफड़ो की बिमारियाँ जैसे टी.बी. और दमा को भी ठीक करता है.

इस प्राणायाम से पाचन क्रिया अच्छी बनी रहती है और यह श्वसन प्रणाली को भी सेहतमंद बनाये रखता है.

उज्जयी प्राणायाम दमा के लिए बहोत लाभदायक है क्योंकि इससे फेफड़ो और ब्रोंचिलेस (Bronchiles) की क्षमता बढती है.

उज्जयी प्राणायाम करते समय कुछ बाते अवश्य ध्यान में रखे / Precautions –

1. इस प्राणायाम में साँसे गले की नली को छुकर जानि चाहिये.
2. इस प्राणायाम का कुछ दिनों तक अभ्यास करने के बाद एक बार गहरी सांस ले कर उसे दो बार में छोड़े.

और भी प्राणायाम के बारेमें जानकारी जरुर पढ़े –

  1. अनुलोम विलोम प्राणायाम
  2. कपालभाती प्राणायाम
  3. भ्रामरी प्राणायाम
  4. बाह्य प्राणायाम
  5. Surya Namaskar

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