बच्चों के बुखार के लिए उपाय | Home Remedies For Fever In Babies

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बुखार / Fever किसी बीमारी का प्राथमिक संकेत है लेकिन हमेशा बुखार का अर्थ किसी बड़ी बीमारी से नही होता। बच्चों में ज्यादातर बुखार वायरल इन्फेक्शन के कारण ही होता है। कुछ परिस्थितियों में दंतुरण भी इसका कारण हो सकता है क्योकि इससे शरीर का तापमान बढ़ता है। जब आप अपने शरीर के तापमान को बढ़ा हुआ पाते हो तो आपके लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में आप दुविधा में पड़ सकते हो, ऐसे समय में आपको अपने डॉक्टर की सलाहपर औषधियाँ लेने की जरुरत है। निचे दिए गए कुछ घरेलु उपाय आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते है / Home Remedies For Fever In Babies

बच्चों के बुखार के लिए उपाय / Home Remedies For Fever In Babies

Home Remedies For Fever In Babies

बुखार के समय नवजात शिशु को डॉक्टर द्वारा बतायी गयी दवाइयाँ देने के साथ ही आप कुछ घरेलु उपाय भी अपना सकते हो।
यहाँ निचे शिशु के बुखार को कम करने के 10 उपाय दिए गए है –

1. ठण्डी पट्टी –

जैसे ही आपको शिशु के शरीर में बुखार की अनुभूति होती है वैसे ही सबसे पहले आपको नरम कपडे को पानी में भिगोकर ठंड़ी पट्टी शिशु के सिर पर रखनी चाहिए। पट्टी पूरी तरह से सुख जाये तब समझ जाये की पट्टी ने बुखार सोख लिया है और इससे शरीर का तापमान भी कम होता है।
आप नरम कपडे या स्पंज का उपयोग कर शिशु के कुछ भाग जैसे बगल, पैर और हाथो को भी पोछ सकते हो। इससे आपके शरीर का तापमान भी कम होगा।
नोट – इस प्रक्रिया को करते समय एकदम ठन्डे या आइस वॉटर का उपयोग बिल्कुल ना करे। इससे शरीर के अंदर का तापमान बढ़ सकता है।

2. गुनगुने पानी से स्नान –

गुनगुने पानी से स्नान करने से शिशु को स्वस्थ लगेगा और इससे शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहेगा। ऐसा करने से आपका शिशु अच्छी तरह से सो पायेगा। बुखार से जल्दी निजात पाने के लिए यह जरुरी है।

– 6 महीने से कम की आयु के शिशुओ के लिए कुनकुने पानी में स्पंज को भिगोकर 2 से 3 बार उनके शरीर को पोछे।

– 6 महीने से ज्यादा की आयु के शिशुओ के लिए, उन्हें कुनकुने पानी से रोज़ नहलाये।

नहलाने के बाद उन्हें तुरंत कपडे पहना दे।

नोट – ऐसा करते समय कभी भी ज्यादा गरम या ठन्डे पानी का उपयोग ना करे, इससे आपके शरीर के अंदर का तापमान बढ़ सकता है।

3. स्तनों का दूध –

6 महीने की आयु वाले शिशु जिन्हें बुखार है उनके लिए स्तनों का दूध बहोत महत्वपूर्ण है। इससे शिशु को पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रिएंट्स मिलते है जो शिशु के कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र को मजबुत बनाने का काम करते है और शिशु को बुखार से लढने के लिए तैयार करते है।

स्तनों का दूध शिशुओ में आसानी से पच जाता है। यह बच्चों में भूक भी निर्माण करता है जो उनके जल्दी ठीक होने के लिए जरुरी है।

– आपको कोशिश करनी चाहिए की 6 माह से कम आयु वाले शिशु को हो सके तो स्तनों का दूध ही पिलाये। यदि बुखार होने की वजह से दैनिक अवस्था में आपका शिशु दूध नही पी रहा हो तो दूसरी अवस्था में पिलाने की कोशिश करे।

– यदी आपका शिशु रोज़ ही स्तनों का दूध नही पिता हो तो स्तनों के दूध की जगह पंप करे और चम्मच या बोतल की सहायता से उसे पिलाये।

4. ज्यादा तरल पदार्थ देने की कोशिश करे –

बुखार वाले शिशुओ के लिए यह जरुरी है की उन्हें ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दिए जाये। इससे उनका आंतरिक तापमान कम होगा और ऐसा करने से शिशु को डीहाइड्रेशन की समस्या भी नही होगी।

डीहाइड्रेशन की वजह से शिशु के शरीर में दूसरी समस्या भी हो सकती है और इसके चलते शिशु को ठीक होने में भी समय लगेगा।

बुखार होने की वजह से ज्यादातर शिशु एक ही समय में ज्यादा तरल पदार्थ लेना पसंद नही करते। इसलिए उन्हें एक समय में थोडा ही पिलाये और फिर कुछ समय बाद दोबारा इस प्रक्रिया को दोहराए।

– छोटे शिशुओ को गुनगुने पानी में ओरल रीहाइड्रेशन सोलुशन दीजिये।

– 6 महीने तक के शिशुओ को आप पानी के साथ रीहाइड्रेशन सोलुशन, ठंडा दूध, आइस पॉप, फलो का ज्युस और ठंडा दही मिलाकर भी पिला सकते हो।

5. अपने शिशु को किसी ठंडी जगह पर ही रखे-

जब किसी बीमार शिशु के देखभाल की बात की जाये तो यह जरुरी है की शिशु को रूम तापमान में रखकर उनकी आँखे बंद रखी जाये। और ध्यान रहे की रूम का तापमान ना कम हो ना ज्यादा। अपने शिशु के रूम तापमान को 70 से 74 डिग्री (21.1 से 23.3०C) तक रखना बेहतर होगा।

– यदि आप फैन चला रहे हो तो ध्यान रहे की इसे धीमी स्पीड पर ही चलाये। ध्यान रहे की आपका शिशु सीधे पंखे के निचे ना सोया हो।

– यदि आप AC चला रहे हो तो इसका तापमान सुविधाजनक ही रखे। ध्यान रहे की आपका शरीर एकदम ठंडा भी नही होना चाहिए। शिशु को सूट (Suit) करे ऐसा ही तापमान रखे।

– लगातार रूम हीटर का उपयोग ना करे क्योकि इससे शिशु के शरीर का तापमान बढ़ सकता है।

अपने नवजात शिशुओ को ज्यादातर समय घर पर ही रखे। यदि आपको अपने शिशु को बाहर ले जाना पड़े तो उसे छाव में ही ले जाये।

6. नवजात शिशु को आरामदायक कपडे ही पहनाये

बहोत से माता पिता नवजात शिशुओ में बुखार के समय उन्हें कई सारे कपड़ो से ढँकना या उनपर बहोत से ब्लैंकेट डालना पसंद करते है। ऐसा करने से शिशु के शरीर का तापमान कम होने की बजाये बढ़ने लगता है। यदि शिशु कपड़ो या ब्लैंकेट में लपेटा जाए तो उनका तापमान ज्यादा बढ़ने लगता है। ठंडी हवा के दौरान हलके गर्म कपडे शिशुओ को पहनाने से उनके शरीर का तापमान संतुलित रहता है।

अपने नवजात शिशुओ को हल्के और मुलायम कपडे ही पहनाये। और यदि आपका शिशु सो रहा हो तो आप जरुरत पड़ने पर हल्का ब्लैंकेट भी डाल सकते हो।

अपने शिशुओ के शरीर को आरामदायक कमरे में ही रखे, जहाँ का तापमान न कम हो ना ज्यादा।

7. पैरो की मसाज –

अपने नवजात शिशु के पैरो कद निचले भाग को गर्म तेल की सहायता से रगड़े। इससे शिशु को सिर्फ आरामदायक ही महसुस नही होगा बल्कि इससे आपका शिशु शांत भी रहेगा और शिशु को अच्छी नींद भी आएगी जो बुखार के समय में उसके जल्दी ठीक होने के लिए बहोत जरुरी है।
पैरो को मसाज करने से आपके शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है।

1. अपने शिशु के पैरो के निचले भाग पर गर्म जैतून के तेल से मालिश करे।

2. अपने अंगूठे और हथेलियो की सहायता से पैरो के निचले भाग पर मसाज करते समय हल्का जोर लगाये।

3. अंत में पुरे पैरो की मसाज करे।

4. ऐसा सिर्फ 4 मिनट तक ही करे और जरुरत पड़ने पर दोबारा दोहराए।

जब पैरो के मसाज की बात की जाये तो ध्यान रहे की ज्यादा जोर से और ज्यादा देर तक मसाज ना करे।

8. एप्पल साइडर विनेगर –

1 साल या उससे कम उम्र के शिशुओ के लिए आप एप्पल साइडर विनेगर का उपयोग भी कर सकते हो। क्योकि एप्पल साइडर विनेगर शरीर के तापमान को भी कम करता है।

1. 1 कप एप्पल साइडर विनेगर को भगोनेभर गुनगुने पानी में मिलाये।

2. उसमे एक मुलायम कपडे को भिगोए और निचोड़कर ज्यादा पानी को निकाल ले।

3. आप अपने शिशु की मसाज स्पंज से भी कर सकते है।

4. इस प्रक्रिया को दिन में 2 से 3 बार दोहराए जबतक की बुखार चला नही जाता।

9. तुलसी –

1 साल के कम की उम्र के शिशुओ के लिए तुलसी लाभदायक साबित हो सकती है। इससे शरीर का तापमान भी कम होता है। यह नेचुरल एंटीबायोटिक और इम्यून बूस्टर का काम करती है।

– एक मुट्ठी तुलसी को 2 कप पानी में उबाले। उबालने के बाद उसमे थोड़ी सी शक्कर डाले और अपने शिशु को दिन में कुछ समय जरूर दे।

– यदि आपके शिशु को कफ हुआ है तो शिशु को तुलसी की पत्तियाँ चबाने के लिए दीजिये।

10. शरीर के तापमान को नियंत्रित रखे –

जब नवजात शिशु को बुखार हो जाये तो उसके शरीर के तापमान का ध्यान रखना बहोत जरुरी है।

अपने शिशु के शरीर के तापमान की रोज़ जाँच करवाये और उसे एक बुक में लिखकर रखे। और डॉक्टर के पाते समय वह भी साथ ले जाये इससे डॉक्टर को परेशानी समझने में आसानी होगी।

टिप्स –

1. अपने नवजात शिशु की समय-समय पर जाँच करवाये, रात में एक बार अपन्स शिशु को स्वयं देखे।

2. यदि आपको अपने शिशु के शरीर में डीहाइड्रेशन के संकेत दिखाई देते है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करे।

3. आपके नवजात शिशु ने हर चार घंटे में एक बार टॉयलेट करनी ही चाहिए और टॉयलेट हल्के रंग की होना जरुरी है।

4. यदि आपका शिशु दिनभर रोते रहता है और रोना बंद नही करता तो अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य ले।

5. बुखार के समय में अपने शिशु को अपने पास ही रखे।

6. बुखार के समय आप अपने शिशु को ठोस खाद्य पदार्थ दे सकते हो लेकिन उन्हें जबरदस्ती नही करनी चाहिए।

7. उन्हें मुलायम और ताज़ा खाना ही खिलाये।

8. यदि आपके डॉक्टर ने शिशु को औषधि देने की सलाह दी है तो उसे ज्यादा औषधि देने की कोशिश ना करे। औषधि देते समय किसी मेजरिंग डिवाइस (गणना यंत्र) का उपयोग करे।

9. बुखार के समय अपने शिशु को हमेशा अप टू डेट रखे।

ऊपर बताये गए कुछ आसान उपयो को अपनाकर आप नवजात शिशु के बुखार को कम कर सकते हो।

यदि आपके नवजात शिशु में किसी बीमारी या बुखार के दूसरे संकेत दिखाई देते है, जैसे दस्त, कफ और उल्टी के समय तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लेवे। हमने ये उपाय हमारे हिसाब से बताये हैं आप इन उपायोको अपने डॉक्टर की सलाह से परखे और फिर उपयोग में लाये | माता-पिता होने के नाते अपनी सूझ-बुझ पर हमेशा भरोसा रखे। यदि किसी परिस्थिति में आपको लगता है की डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए तो आपको निश्चित ही आगे बढ़ना चाहिए।

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3 Comments
  1. gyanipandit says

    आपने बुखार कम करने के घरेलु उपाय काफी अच्छे बताये हैं, आशा हैं की इन उपायों से सभी को फायदा होंगा.

  2. kavita says

    Comment:meri baby 7 days ki h uska body temperature kitna hona chahiye please tell me

  3. Pooja sarwa says

    Baccho ko bukhar ho toh…Ham ye karate hi Hai.. but aap ke suzav se confidence se kar payenge ki ye sahi hai

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