भस्त्रिका प्राणायाम | Bhastrika Pranayam

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जीवन में व्यस्तता के कारण हमने अपनी सेहत पर ध्यान देना बंद कर दिया है. हम अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने लगे तो इसका असर आपकी सेहत पर दिखाई देता है. इंटरनेट / Internet आने से हम अपना मन शांत एवं स्थिर नही रख पा रहे है. अपने शरीर व दिमाग की ताजगी के लिए शरीर को समय देना आवश्यक है. बाबा रामदेव योगा / Baba Ramdev Yoga में अलग-अलग योग अवस्थाएं और योग से होने वाले लाभों की बात की जाये तो यह अनगिनत है जो अच्छी सेहत और शरीर को तंदरुस्त करने के लिए सहायक होती है। भस्त्रिका प्राणायाम / Bhastrika Pranayam से आप शरीर और दिमाग में एक ताज़गी आ जाएँगी.

भस्त्रिका प्राणायाम / Bhastrika Pranayam
Bhastrika Pranayam

योगा / Yoga और ध्यान से हम अपना मन और शरीर शांत रख सकते है. विविध प्राणायाम / Pranayam से शारीरिक क्षमता और ऊर्जा का विकास होता है. योगा / Yoga प्राणायाम भारत के ऋषि मूनियों की खोज है. योग और प्राणायाम के बारे में खोज करने पर योग और ध्यान के बहुत से रूप सामने आये है जैसे पॉवर(Power) योगा और विक्रम योगा. प्राणायाम / Pranayama एक सांसों का व्यायाम है जो श्वसन प्रणाली को बेहतर बनाता है और बिमारियों से बचाता है. संस्कृत में भास्त्री का अर्थ है “फूंकनि”. मस्तिका प्राणायाम के द्वारा शरीर की अशुद्ध हवा को तेजी व लगातार बाहर किया जाता है.

भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करे / How To Do Bhastrika Pranayam –

पद्मासन में बैठ कर गर्दन शरीर और पीठ सीधी रखे और मुह को बंद रखे. अब तेज़ी से साँसों को अंदर-बाहर करते रहे ताकी पेट सिकुड़ने लगे और इसका विस्तार होने लगे. जब आप इस प्राणायाम का अभ्यास करेंगे तो नाक से भूऊ भूऊ की आवाज आने लगेगी. जिसे भी इसका अभ्यास करना है उसे साँसों को तेजी से बाहर छोड़ना चाहिये. ऐसा 10 बार होने पर एक लम्बी सांस लेनी चाहिये व इसे धीरे धीरे बाहर छोड़ना चाहिये. इस तरह से भस्त्रिका का पहला दौर समाप्त होंगा. फिर सामान्य सांस लेते हुए आराम करे. इस से मन शांत होंगा व शरीर दुसरे चरण के लिए तैयार होंगा. इस प्रक्रिया को रोज सुबह 3 बार दोहराये. इस तरह से 3 बार इस प्रक्रिया को शाम को भी कर सकते है. जो व्यस्त रहते है वे इस प्रक्रिया को एक बार पूरा करके भी इसका लाभ ले सकते है जिसमे शरीर चुस्त दुरुस्त रहे.

कपालभाती व उज्जयी प्राणायाम को मिलाने पर भस्त्रिका प्राणायाम / Bhastrika Pranayam In Hindi का निर्माण होता है. कपालभाती और उज्जयी के अभ्यास से आप आसानी से भस्त्रिका कर सकते है. इसे लम्बे समय तक करते रहने से आप थकान महसूस कर सकते है एवं आपको पसीना भी आने लगेगा. ऐसे समय में आप थोड़ी देर आराम करें और सामान्य सांसे ले और पुनः अभ्यास करे. एवं जाड़े के मौसम में सुबह-श्याम दोनों ही समय में कर सकते है. गर्मी में इसे सुबह ही करे क्योंकि उस वक्त ठंडक होती है.

भस्त्रिका प्राणायाम से लाभ / Benefits Of Bhastrika Pranayama –

1. गले की खराश कम करता है.

2. पेट की जलन भी कम होती है.

3. नाक और छाती से सबंधित बिमारियाँ दूर होती है व अस्थमा ठीक होता है.

4. एपेटाइट (Appetite) इस से अच्छा होता है.

5. ट्युमर (Tumors) को गला देता है व ठीक करता है.

6. इससे कुंडलिनी जागृत हो सकती है.

7. हवा से संबधित बीमारियों को दूर रखता है.

8. इससे शरीर गर्म रहता है.

9. शरीर की नाडीयों को शुद्ध करता है.

10. ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाता है.

11. इस प्राणायाम के द्वारा त्रिदोष वात, पित्त, कफ को संतुलित बनाया जा सकता है और इस से रक्त शुद्ध होता है.

12. इससे मन शांत रहता है.

इस प्राणायाम / Pranayam को करने वाले किसी भी बीमारी से ग्रसित नही होते है. इस प्राणायाम को करने से शरीर स्वस्थ रहता है. आपको भस्त्रिका का अभ्यास करते रहना चाहिये. इसके आखरी पड़ाव में कुछ बदलाव है. सांसो को 20 बार अंदर बाहर करे, दांई नासिका से जितनी ले सके उतनी सांस अंदर ले और बांई नासिका से छोड़े.

अगर सर्दी या जुखाम के कारण किसी को नासिका बंद हो, तो वह अपनी दांई नासिका को बंद करे और बांइ नासिका से सांस अंदर बाहर करे व बांई नासिका को बंद करे व दांई से सांस अंदर बाहर करे. बारी बारी से इस प्रक्रियाहो को दोहराये जब तक दोनों नासिका खुल न जाये. प्राणायाम का समापन रेचक और पूरक के साप ईडा और पिंगला के साथ होना चाहिये.

भस्त्रिका करते समय जब आप सांस अंदर ले रहे हो तब आप दिमाग पर ध्यान दे सभी ईश्वरीय शक्ति शुद्धता शांति और ख़ुशी, जो इस दुनिया में है जिस से हमें ख़ुशी मिलती है वह सब आप में आ रही है. ऐसा सोचते हुए प्राणायाम करेंगे तो आपको इस के लाभ मिलेंगे.

इस प्राणायाम को करते समय आप अपनी आखों को बंद रखे और “ॐ” मंत्र का जाप करे.

सावधानियाँ / Precautions –

1. इस प्राणायाम को जिन्हें हाई बी.पि. है वे ना करे.
2. गर्भवती महिलाओ को भी भस्त्रिका नही करना चाहिये.
3. इस प्राणायाम को आरंभ में धीरे धीरे करे. शरीर को इस प्राणायाम की आदत पड़ने और अपनाने में समय लगता है.

और भी प्राणायाम के बारेमें जानकारी जरुर पढ़े –

  1. अनुलोम विलोम प्राणायाम
  2. कपालभाती प्राणायाम
  3. उज्जायी प्राणायाम
  4. भ्रामरी प्राणायाम
  5. बाह्य प्राणायाम
  6. Surya Namaskar

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Please Note :- भस्त्रिका प्राणायाम / Bhastrika Pranayam  बनाने के लिए दी गयी जानकारी को हमने हमारे हिसाब से बताया है.

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